मौसम में बदलाव के कारण वायरल फीवर होता है। बारिश का मौसम जब भी शुरू होता है तब इसका असर सीधे इंसान के शरीर पर होता है। जो वायरल फीवर के रूप में देखा जाता है। बच्चे, बूढ़े या जवान सभी को वायरल फीवर प्रभावित करता है क्यूंकि ये मौसम मनुष्य के इम्युनिटी को कमजोर करता है।
धनिया चाय का सेवन⤵
जब भी आपको वायरल बुखार हो आप नियमित धनिया चाय को पीएं। धनिया चाय का सेवन करना वायरल बुखार को दूर करने का सबसे सरल उपाय है। यह एक प्राकृतिक घरेलू उपाए है। धनिया चाय का सेवन वायरल फीवर को रोकने का काम करते हैं।
धनिया चाय बनाने की विधि ⤵
एक चम्मच धनिया दाने को एक गिलास पानी में डालें। और इसे गैस में रखकर उबाल लें। जब यह उबल जाए तब आप इसे छान लें और इसे मरीज को दें। इसके पेय के सेवन से वायरल फीवर उतर जाता है।
लौंग और तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल⤵
तुलसी और लौंग दोनों में ही एन्टी बैक्टिरीअल त्वत होते हैं जो वायरल फीवर के कीटाणुओं को मारने में मदद करते हैं। यदि किसी को वायरल फीवर हो गया हो तो आप पंद्रह से बीस पत्तें तुलसी के तोडें और इसे एक लीटर पानी में डाल दें। और फिर इसमें एक लौंग डालकर उबाल लें। जब यह पानी उबल कर आधा रह जाए तब आप इस पानी को छानकर किसी डिब्बे या गिलास में रख लें। जब यह ठंडा हो जाए तब आप रोगी को हर दो घंटे में इसका सेवन कराएं।
वायरल फीवर में मेथी के फायदे⤵
प्राकृतिक और औषधिय गुणों से भरपूर होती है मेथी। मेथी में भी एन्टी बैक्टिरीअल गुण होते हैं। जो बुखार से इंसान को बचाते हैं। कैसे करें मेथी का प्रयोग वायल फीवर में आप सबसे पहले एक कटोरी में पानी भरें और फिर इसमें एक बड़ी चम्मच मेथी के दानों को डालकर रात भर भीगोने के लिए रख दें। इसके बाद सुबह के समय इस पानी को छान लें और हर एक घंटे में इस पानी को बुखार से परेशान इंसान को पिलाएं। एैसा करने से रोगी का बुखार जल्दी ही उतर जाएगा।
इसके अलाव आप मेथी का दूसरा उपाय भी कर सकते हो वायरल फीवर से बचने के लिए। आप शहद में नींबू का रस और थोड़ा मेथी के दाने डालकर इसका सेवन कर सकते हो। सोआ काढ़ा जड़ से खत्म करता है वायरल बुखार को सोआ में कई तरह के प्राकृतिक गुण होते हैं जो इंसान के रोगप्रतिरोधक क्षमता यानि बीमारियों से लड़ने वाले तंत्र को मजबूत बनाते हैं। वायरल फीवर में सोआ का काढ़ा बनाकर पीने से फायदा मिलता है।
सोआ काढ़ा कैसे बनाते हैं⤵
आप एक चम्मच काली मिर्च, एक छोटी चम्मच कलौंजी और एक चम्मच सोआ के दाने को एक कप पानी में डाल दें और इसे उबालने के लिए रख दें। अब एक चुटकी दालचीनी के चूर्ण को इसमें उपर से डाल दें। अब इसे अच्छे से मिलाएं। इस तरह से आपका सोआ काढ़ा बन जाएगा।
सोआ काढ़ा को सेवन का तरीका⤵
आप सोआ काढ़ा को वायरल फीवर से ग्रसित इंसान को पिलाएं। आपको बता दें कि सोआ में मोनोटर्पीन और फल्वेनॉयड गुणकारी तत्व होते हैं।
चावलों का स्टार्च ⤵
चावलों के स्टार्च को हम राईस मांड भी कहते हैं। यह स्टार्च वायरल बुखार को कम करने में मदद करता है। और हमारे शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकलता है, राइज स्टार्च सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।
बुखार में करें सौंठ का इस्तेमाल⤵
सूखे अदरक का चूर्ण मतलब सौंठ बुखार को खत्म करने के लिए बहुत ही उपयोगी औषधि है। सौंठ हमें और भी कई बीमारियों से बचाता है। सौंठ में एन्टी इनफ्लैमटोरी गुण होते हैं। और इसमें एन्टीआॅक्सिडेट भी होता है। जो जड़ से वायरल बुखार को खत्म करता है।
सौंठ का प्रयोग कैसे करना है⤵
एक कप पानी में थोड़ा सा सूखा अदरक, एक छोटी चम्मच काली मिर्च का चूर्ण, साथ में दाल चीनी का चूर्ण और एक चुटकी हल्दी डालकर उबाल लें। जब यह उबलकर आधा रह जाए तब आप इसे मरीज को पिलाएं। इस उपाय से वायरल फीवर उतर जाएगा।
एक बात ध्यान रखना जरूर है कि यदि इन उपायों से आपको राहत ना मिलें तो बिना देर किए तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाएं।
धनिया चाय का सेवन⤵
जब भी आपको वायरल बुखार हो आप नियमित धनिया चाय को पीएं। धनिया चाय का सेवन करना वायरल बुखार को दूर करने का सबसे सरल उपाय है। यह एक प्राकृतिक घरेलू उपाए है। धनिया चाय का सेवन वायरल फीवर को रोकने का काम करते हैं।
धनिया चाय बनाने की विधि ⤵
एक चम्मच धनिया दाने को एक गिलास पानी में डालें। और इसे गैस में रखकर उबाल लें। जब यह उबल जाए तब आप इसे छान लें और इसे मरीज को दें। इसके पेय के सेवन से वायरल फीवर उतर जाता है।
लौंग और तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल⤵
तुलसी और लौंग दोनों में ही एन्टी बैक्टिरीअल त्वत होते हैं जो वायरल फीवर के कीटाणुओं को मारने में मदद करते हैं। यदि किसी को वायरल फीवर हो गया हो तो आप पंद्रह से बीस पत्तें तुलसी के तोडें और इसे एक लीटर पानी में डाल दें। और फिर इसमें एक लौंग डालकर उबाल लें। जब यह पानी उबल कर आधा रह जाए तब आप इस पानी को छानकर किसी डिब्बे या गिलास में रख लें। जब यह ठंडा हो जाए तब आप रोगी को हर दो घंटे में इसका सेवन कराएं।
वायरल फीवर में मेथी के फायदे⤵
प्राकृतिक और औषधिय गुणों से भरपूर होती है मेथी। मेथी में भी एन्टी बैक्टिरीअल गुण होते हैं। जो बुखार से इंसान को बचाते हैं। कैसे करें मेथी का प्रयोग वायल फीवर में आप सबसे पहले एक कटोरी में पानी भरें और फिर इसमें एक बड़ी चम्मच मेथी के दानों को डालकर रात भर भीगोने के लिए रख दें। इसके बाद सुबह के समय इस पानी को छान लें और हर एक घंटे में इस पानी को बुखार से परेशान इंसान को पिलाएं। एैसा करने से रोगी का बुखार जल्दी ही उतर जाएगा।
इसके अलाव आप मेथी का दूसरा उपाय भी कर सकते हो वायरल फीवर से बचने के लिए। आप शहद में नींबू का रस और थोड़ा मेथी के दाने डालकर इसका सेवन कर सकते हो। सोआ काढ़ा जड़ से खत्म करता है वायरल बुखार को सोआ में कई तरह के प्राकृतिक गुण होते हैं जो इंसान के रोगप्रतिरोधक क्षमता यानि बीमारियों से लड़ने वाले तंत्र को मजबूत बनाते हैं। वायरल फीवर में सोआ का काढ़ा बनाकर पीने से फायदा मिलता है।
सोआ काढ़ा कैसे बनाते हैं⤵
आप एक चम्मच काली मिर्च, एक छोटी चम्मच कलौंजी और एक चम्मच सोआ के दाने को एक कप पानी में डाल दें और इसे उबालने के लिए रख दें। अब एक चुटकी दालचीनी के चूर्ण को इसमें उपर से डाल दें। अब इसे अच्छे से मिलाएं। इस तरह से आपका सोआ काढ़ा बन जाएगा।
सोआ काढ़ा को सेवन का तरीका⤵
आप सोआ काढ़ा को वायरल फीवर से ग्रसित इंसान को पिलाएं। आपको बता दें कि सोआ में मोनोटर्पीन और फल्वेनॉयड गुणकारी तत्व होते हैं।
चावलों का स्टार्च ⤵
चावलों के स्टार्च को हम राईस मांड भी कहते हैं। यह स्टार्च वायरल बुखार को कम करने में मदद करता है। और हमारे शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकलता है, राइज स्टार्च सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।
बुखार में करें सौंठ का इस्तेमाल⤵
सूखे अदरक का चूर्ण मतलब सौंठ बुखार को खत्म करने के लिए बहुत ही उपयोगी औषधि है। सौंठ हमें और भी कई बीमारियों से बचाता है। सौंठ में एन्टी इनफ्लैमटोरी गुण होते हैं। और इसमें एन्टीआॅक्सिडेट भी होता है। जो जड़ से वायरल बुखार को खत्म करता है।
सौंठ का प्रयोग कैसे करना है⤵
एक कप पानी में थोड़ा सा सूखा अदरक, एक छोटी चम्मच काली मिर्च का चूर्ण, साथ में दाल चीनी का चूर्ण और एक चुटकी हल्दी डालकर उबाल लें। जब यह उबलकर आधा रह जाए तब आप इसे मरीज को पिलाएं। इस उपाय से वायरल फीवर उतर जाएगा।
एक बात ध्यान रखना जरूर है कि यदि इन उपायों से आपको राहत ना मिलें तो बिना देर किए तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाएं।

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